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25 नवम्बर का इतिहास

♓🅰♉🚩🅾♏ *भारतीय एवं विश्व इतिहास में 25 नवंबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ।* ☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆ 1667 - रूस के उत्तरी कॉकसस क्षेत्र के सेमाखा में ...

Saturday, 3 February 2018

भाषा का अर्थ

*भाषा का अर्थ--:* भाषा क्या है? इस पर विभिन्न विद्वानों ने अपने- अपने विचार एवं मत अलग- अलग तरीके से व्यक्त किए हैं। साधारणतया "भाषा" शब्द का प्रयोग विचारों अथवा भावों की अभिव्यक्ति के लिए प्रयुक्त उन सभी साधनों के लिए होता है, जो चेतन प्राणियों एवं जड़ पदार्थों में देखें एवं सुने जाते हैं। उदाहरण के लिए मानव परस्पर विचार- विनियम के लिए जिन ध्वनि संकेतों को अपनाते हैं। वे सभी भाषा कहलाते हैं। पशु तथा पक्षी जिस ध्वनि का प्रयोग करके अपनी विविध भावों को व्यक्त करते हैं , उसे पशु एवं पक्षियों की भाषा कहा जाता है।
        भाषा मानव भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम है। यह विचार- विनियम का साधन है। यह भाव, विचार, अनुभव आदि को व्यक्त करने का संगीत एक साधन है।

मातृभाषा

*मातृभाषा--:* भाषा का प्रथम रुप ```'मातृभाषा'``` है। मातृभाषा का शाब्दिक अर्थ है -- माँ से ग्रहण की हुई भाषा, किन्तु हम 'जननी जन्मभूमिश्च' कह कर मां के विशाल रूप में मातृभूमि को भी देखते हैं। अतः जन्म भूमि में व्यवहृत भाषा को मातृभाषा कहते हैं । कभी-कभी मां की भाषा और मातृभूमि की स्वीकृत भाषा में अंतर होता है । उत्तर प्रदेश में अधिकांश छात्र प्रारंभ में अपनी माता के मुंह से अवधी,ब्रज, भोजपुरी, आदि सुनते हैं किंतु उत्तर प्रदेश की मातृभाषा हिंदी है। अवधी, ब्रज, भोजपुरी आदि हिंदी की बोलियां है । ये स्वतंत्र भाषाएँ नहीं है। इन्हें जनपद भाषा भी कहा जाता है। संसार के सभी देशों में स्वीकृत भाषाओं की अपनी-अपनी बोलियां भी है। अंग्रेजी इंग्लैंड की मातृभाषा है। किंतु वेल्स - जैसी समृद्ध भाषा को भी बोली का ही स्तर मिल सका है। जनपद भाषाओं को मातृभाषा के समकक्ष नहीं रखा जा सकता। बैलार्ड़ ने घर की बोली को 'माता की भाषा' और समाज द्वारा स्वीकृत भाषा को 'मातृभाषा' कहा है।

Friday, 2 February 2018

गामक विकास को प्रभावित करने वाले कारक

*गामक विकास को प्रभावित करने वाले कारक ।*
*1-:वंशानुक्रम--:* बालक के गामक विकास पर उसके माता-पिता तथा पूर्वजों की स्वास्थ्य का प्रभाव पड़ता है।
*2-:गर्भावस्था की दशाएं--* बालक के गामक शक्तियों का विकास गर्भावस्था की दशाओं पर निर्भर करता है। गर्भावस्था में भ्रूण में विकार आने से उसकी गामक शक्तियों में क्षीणता आ जाती है। माता- पिता का खान-पान, स्वास्थ्य तथा शारीरिक दशाओं का भ्रूण के विकास पर प्रभाव पड़ सकता है जो उसके गामक विकास को प्रभावित करता है।
*3-: शारीरिक विकास की दशाएं---:* बालक की हड्डियों मांसपेशियों तथा स्नायु तंत्र का सामान्य रूप से विकास होता है तो उसका गामक विकास सामान्य रूप से संभव होगा। क्योंकि इन्हीं कारको पर गामक विकास निर्भर करता है।
*4-:परिपक्वता---:* बालक की विभिन्न गुणों के विकास की परिपक्वता का उसके गामक विकास पर प्रभाव पड़ता है। यदि किसी गामक क्रिया हेतु, उसके शारीरिक या मानसिक गुण एक विशेष स्थिति में परिपक्व नहीं हो जाते तो वह काम क्रिया को नहीं कर सकते। जैसे-- चलने के लिए आवश्यक है कि शिशु के पैर की हड्डियां इतनी परिपक्व हो कि वह शरीर का बोझ संभाल सके।
*5-:आहार-:* बालक का खान-पान  तथा आहार उसके गामक विकास को प्रभावित करते हैं। खान-पान अथवा आहार वह ऊर्जा प्रदान करती है, जिससे उसके अंगों तथा मांस पेशियों में गति तथा वेग उत्पन्न हो सके। गामक विकास हेतु पौष्टिक एवं संतुलित आहार आवश्यक है ,जिससे उसके शरीर के अंग तथा मांसपेशियों हृष्ट- पुष्ट हो सके।
*6-: स्वास्थ्य-:* बालक के स्वास्थ्य का उसके गामक विकास पर प्रभाव पड़ता है। अस्वस्थ अथवा रोगी बालक कार्य करने में सक्षम नहीं होता, जिससे उसके अंग माँसपेशियाँ तथा स्नायुतंत्र शिथिल हो जाते हैं। अतः उसका गामक विकास अवरुद्ध हो जाता है।
*7-: व्यायाम--:* बालक के गामक विकास पर व्यायाम एवं खेलकूद तथा मालिश आदि का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। इससे प्रत्येक आयु में उसके अंग- प्रत्यंग, मांसपेशियों तथा स्नायु तंत्र स्फूर्तिवान तथा संचालित रहते हैं तथा दृढ़ता प्रदान करते हैं। इसलिए जन्म के उपरांत से ही शिशु को तेल मालिश और व्यायाम कराया जाता है। खेल कूद और शारीरिक कार्य भी व्यायाम  का ही रूप है।
*8-: अधिगम--:*  अधिगम का भी प्रभाव बालक के गामक विकास पर पड़ता है। बालक विभिन्न प्रकार की परिस्थितियों के प्रति समायोजन स्थापित करने का प्रयास करता है और सफलता प्राप्त करने हेतु गामक कुशलता अर्जित करता है। बालक प्रायः सभी क्रियात्मक कार्यों को करना सीखता है, इसके लिए वह किसी कार्य को करने का अभ्यास करता है तथा त्रुटियों को सुधारता है। गामक कौशल के विकास में अनुदेश, प्रदर्शन तथा शिक्षण आदि का प्रभाव पड़ता है। जिनका संबंध अधिगम से ही होता है।

Thursday, 1 February 2018

गामक विकास के अर्थ वा इसकी विशेषताएँ।

*Q . गामक विकास के अर्थ वा इसकी विशेषताएँ।*
उत्तर-: गामक विकास से तात्पर्य बालकों में उनकी मांसपेशियों तथा तंत्रिकाओं की समन्वित कार्य द्वारा अपनी शारीरिक क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त करने से होता है। जन्म लेने के बाद बच्चा हाथ, पैर हिलाने-डुलाने तथा फैलाने-सिकोड़ने की क्रिया करने लगता है और धीरे-धीरे गर्दन, आंख की पुतलियाँ; धड़ तथा अन्य अंग चलाने लगता है।
          यही अंगों की संचालन के क्रिया और उसमें होने वाले प्रगतिशील एवं अपेक्षित परिवर्तन को गामक विकास कहते हैं । *हरलॉक* के अनुसार-- "गामक विकास से अभिप्राय है-- मांसपेशियों की उन गतिविधियों का नियंत्रण जो जन्म के समय के पश्चात निरर्थक एवं अनिश्चित होती है।" गामक विकास में शरीर के अंगों, मांसपेशियों तथा स्नायुमंडल की शक्तियां एवं क्रियाशीलता अथवा क्षमता की समन्वित व्याख्या की जाती है। *क्रो एवं क्रो* ने गामक विकास के संबंध में विचार व्यक्त करते हुए कहा है-- " स्नायुमंडल तथा मांसपेशियों की क्रियाओं के समीकरण द्वारा जो शारीरिक क्रियाकलाप संभव हो सकता है, उन्हें गामक क्रिया कहते हैं।" गामक क्रियाओं में गतिशीलता एवं उसका ठीक ठाक होना भी सम्मिलित है। *गैरिसन* के अनुसार--- " शक्ति, अंग- सामंजस्य तथा गति का और हाथ पैर एवं शरीर की मांसपेशियों के ठीक-ठाक उपयोग का विकास बालक की संपूर्ण विकास की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।"  गामक विकास का महत्व बाल्यावस्था तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रौढ़ अथवा वयस्क अवस्था से लेकर मृत्युपर्यंत गामक विकास का महत्व है। जीवन की संपूर्ण अवस्थाओं में गामक दक्षता की आवश्यकता रहती है।
 *```गामक विकास की विशेषताएं*```
 *थाॅम्पसन* ने गामक विकास की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है----
1)-: विशिष्ट प्रवृतियाँ--: आरंभ में समूचा शरीर गति करता है, लेकिन धीरे-धीरे विशेष पेशी या पेशी समूह ही सही समय पर गति करता है । दूसरे शब्दों में , बच्चे की पेशी प्रतिक्रिया कम से कम अनुकूलित होती जाती है ।
2-: बड़ी से छोटी पेशी की ओर----:  बढ़ती आयु के बालक का सबसे पहले समन्वित नियंत्रण बड़े पेशी समूह पर स्थापित होता है।
3-: सिर से नीचे की ओर ---: गामक विकास में विकास की दिशा एक नियम है। सबसे पहले सिर के भाग में नियंत्रण दिखाई पड़ता है तथा क्रमशः धड़ में नीचे की और अवनत होता हुआ पैरों तक पहुंचता है । उदाहरणार्थ, जन्म के 1 सप्ताह बाद बच्चा अपना सिर उठाने लगता है लेकिन 1 वर्ष पूरा होने के बाद ही अपने पैरों पर खड़ा हो पाता है।  गामक विकास से पहले उन ढाँचों में होता है जो प्रमुख धुरी के अति निकट है और इसके बाद ही दुरस्त ढाँचों में होता है । उदाहरणार्थ, पेशी नियंत्रण सबसे पहले भुजाओं में और इसके बाद अंगुलियों में होता है।
4-: द्विपक्षीय से एकपक्षीय  प्रवृत्ति---:  चाल, शक्ति, समन्वय के निबंधनों में बच्चा परिपक्व बनता है तथा वैयक्तिक रूचि क्रमशः गामक कौशल में एकपक्षी कार्य करने का मार्ग बनता है।  हाथ को प्राथमिकता देने की परिवर्ती से इसको समझा जा सकता है। आयु बढ़ने के साथ बच्चा अपने एक हाथ का लगातार प्रयोग करता है।
5-: पेशियों के अधिकतम कार्य की न्यूनतम कार्य की ओर बढ़ने की परिवर्ती--:  परिपक्व होने के साथ ही बच्चा पेशियों से अधिक कार्य करने लगता है। बड़ी मात्रा में पेशी का निष्प्रयोजन कार्य प्रारंभ होता है और बाद में वह पेशी शक्ति को अधिक से अधिक खर्च करने लगता है। जब बच्चा चलना सीखता है तो पेशियों की गति बहुत तीव्र होने लगती है । नए गामक कौशल में प्रवीण बनने का प्रयास करते समय बच्चों में आतुरता और जल्दबाजी प्रत्यक्षता देखी जा सकती है।
6-: सामान्य क्रमिकता-:  बच्चों के गामक विकास में एक क्रमिक व्यवस्था दिखाई पड़ती है। सबसे पहले आंखों का संतुलन बनता है। इसके पश्चात सिर भाग्य की मुद्रा में नियंत्रण और बाद में क्रमशः धड़ भाग में नियंत्रण स्थापित होता है। इसके पश्चात टांगो की गति में अंतिम नियंत्रण स्थापित होने पर बच्चा सरकना, कोहनी के बल चलना, खड़ा होना और चलना सीखता है। इस कथन की पुष्टि हरलॉक में यह कहकर कि है कि शिरोभाग में गामक विकास सबसे पहले होता है। इसके पश्चात भुजाओं और हाथों तथा अंत में टांगो की गामक शक्ति का विकास होता है।
         कई पहलुओं पर गामक विकास सुस्थिर क्रम को अपनाता है किंतु कुछ व्यक्तिगत विभिन्नताएं इस बात का साक्ष्य हैं कि कुछ बच्चे इसके श्रेणीक्रम में कुछ सोपानों को छलांग मारकर पार कर जाते हैं और कुछ अन्य पेशियों के गति करने के अवसर कम मिलने के कारण अपने हाथों पर नियंत्रण बहुत समय बाद प्राप्त कर पाते हैं। कुछ ऐसे ही होते हैं जो प्रेरित और उत्साहित किए जाने पर समय से भी पहले पेशी नियंत्रण की क्षमता प्राप्त कर लेते हैं। स्वास्थ्य, आहार आदि कुछ ऐसे कारक है जो बालकों के गामक विकास में अंतर कर देते हैं।

Friday, 22 December 2017

जागृति कुशवाहा संघ नावागढ़ के सदस्य जो सरस्वती पूजा में आगे आने वाले दिनों में बढ़चढ़ कर सहयोग देने वाले ।
गामी पूजा के मूर्ति सहयोग को इच्छुक सदस्य ।
*नरेंद्र प्रसाद वर्मा --- 2018, एवं पाण्डेय वा पुजारी के पास पूजा में लगने वाला समान विकास कुमार वर्मा ।*
*विकास कुमार वर्मा --- 2019*
*अभय कुमार वर्मा ---- 2020*
*मनोहर प्रसाद वर्मा (पिता-  श्री बलदेव महतो)---- 2021*
*नितिन कुमार वर्मा --- 2022*
*विक्की कुमार वर्मा ----- 2023*
 *विक्रम कुमार वर्मा ---- 2024* साथ में पूजा खर्च।
आगे आपकी बारी है,जोर शोर से चल रही सरस्वती पूजा की तैयारी है।

जो भक्त है माँ शारदे का,अब भी उपाय लगा लेंगे विद्या से दिमाग भरने का।

आर्थिक, शारीरिक और इसके अलावे अन्य विशेष सहयोग के साथ आप सब आमंत्रित है ताकि हम और भी भव्यता से हर्षोउल्लास के साथ मना सके सरस्वती पूजा का कार्यक्रम ।



Saturday, 9 December 2017

भक्षक भीड़ बुद्धिजीवियों के पहल पर बना रक्षक।

पोस्टर फाडे जाने के बाद उग्र सदस्यों को बुद्धिजीवियों ने रोका।

शनिवार 09 दिसम्बर 20017
धनवार(नावागढ़ चट्टी)हरि ॐ-:धनवार प्रखंड़ के नावागढ़ चट्टी चौक पर गैर संप्रदाय सदस्य ... द्वारा धर्म अवहेलना कर असामाजिकता का परिचय देते हुए। आपसी भाईचारे को बिगाड़ने का कार्य देखने को मिला । प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नावागढ़ चट्टी चौक पर कोड़रमा जिला के मरकच्चो प्रखंड़ अंतर्गत डुमरडीहा से यज्ञ से संबंधित धर्म प्रचारक सह धन संग्रहक गाड़ी आकर खड़ी थी। गाड़ी के साथ आए प्रचारक दुकान वा घरों से राशि वा सामग्री संग्रहित कर रहे थे। कुछ होटल में नास्ता करने बैठे थे।इस बीच गैर धर्मावलंबी नवयुवक जो मरकच्चो का बताया जा रहा ने प्रचार गाड़ी में लगे बैनर को झटके में फाड़  दिया। इतना ही नहीं आरोपी ने चल रहे भजन को भी आनन फानन में बंद कर दिया। इतना करने के बाद भागने का प्रयास करता. इससे पहले भीड़- भाड़े वाले इस चौक के भीड़ ने उसके मनसूबों पर पानी फेर दिया। तुरंत चारों ओर  से लोगों के गोल घेरे के गिरफ्त में आ गया।तरह तरह के सवालों और बातों से उसे लोगों के घेरे ने अपने अंदर समा लिया। चर्चाओं का बाजार और गर्म हो गया।तरह- तरह की बातें होने लगी। प्रचारक गाड़ी के अन्य सदस्य गाड़ी के पास झमेले को देख फौरन गाड़ी की तरफ भागे। माजरा समझते देर ना लगी, तरह तरह की बातें और प्रश्न आरोपी युवक से पूछी जाने लगी। इस दौरान उग्र सदस्यों को अपने मनसूबों को सफल करने से भीड़ रोकने का अटूट प्रयास करती दिखी। कई तरह के सवालों का आरोपी ने अपने उत्तर में सिर्फ एक रट लगाएँ रखा। गलती हो गयी आगे से ऐसा नहीं होगा। इस दौरान आरोपी युवक को हाथापाई का भी थोड़ा बहुत शिकार होना पड़ा। अंततः कुछ बुद्धिजीवी ग्रामीणों के जुटान होने पर उग्र सदस्यों को हाथापाई और अन्य शरारति कार्यों  से रोका गया। पुलिस प्रशासन को फौरन मामले की जानकारी दी गयी वा हालात से सूचित किया गया। जब तक प्रशासन पहुँचती और आरोपी को सुपूर्द किया जाता यथासंभव बुद्धिजीवियों  ने उग्र भीड़ को अपना रूप और फैसला देने से रोके रखने का कार्य किया ।
               देर शाम तक इलाके में सोशल मीडिया वा अन्य माध्यमों से इसकी खबर फैल चुकी थी। जहाँ कुछ लोग युवक के शराब पिएँ होने की बात कर रहे थे। वहीं कई सदस्य अर्धविक्षिप्त बता रहा था। खैर जो कुछ भी समय रहते प्रशासन को सूचित और भीड़ को फैसला देने से रोके रखकर ग्रामीणों ने मिशाल पेश की।

Thursday, 7 December 2017

प्रेरणदायी शायरी

साथ सबों को लेकर चलना है,हमे आगे बढ़ना है।
शुरू में होगी बहुत परेशानियाँ झेलते हुए आगे निकलना है।।
नक्शे कदम पर चलने को विवश हो जाएंगे पीछे रहने वाले।
मधुर संबंध के साथ राह कुछ ऐसा बनाते हुए आगे निकलना है।।

मंजिल मिलना इतना आसान नहीं यहाँ, कठिन डगर से नहीं ड़रना है।
दूर मंजिल तक अगर निकलना है,सफर में भी संभलना है।।
हौसले भी यहाँ मुफ्त में ना देंगे लोग,पर हासिल हमें करना है।
मधुर संबंध के साथ राह नये और नये सफर पर चलना है।।              *--हरि ॐ---*